तेज और भागम भाग जिंदगी में हम सब गाम क स्मृति से सेहो विलुप्त करैत जा रहल छी। ऐना में अधिकांश समय अप्पने पर लाज सेहो लगैत अछि। यदि ककरो से कही कि गाम में बस चाहे छी, तो अवाक भ क मुंह देख लगैत अछि। ओकर जवाब होएत छै- देखियो..अखनै सठिया गेला ..। त ककरो टिप्पणी होएत छै- बाउ, भावुक नै बनू..इ खयाल क छोड़ि क घर परिवार में जुटि जाउ...। मुदा अप्पन मन में अखैन धरि गाम-अंचल स जुड़ल याद क सहारे लिखबाक इच्छा अछि..जकरा हम इरादा कहैत छिए।
इतिहासकार व समाजविज्ञानी सदन झा अप्पन एकटा लेख में 'अंचल क सांस्कृतिक स्मृति' शब्द क प्रयोग करैत छथिन, हमरा इहै शब्द स राग अछि। त कि यदि योजना बनाकs गाम दिश घुमल जाए त कि खराब। रोजी-रोटी क व्यवस्था ओतउ स करल जा सकैत अछि। मुदा योजना क साकार करबाक हिम्मत हेबाक चाहि और संगे अपना पर भरोसा सेहो। खैर, पढू, जनसत्ता के समांतर स्तंभ में छपल हमर इ कतरन, जै चित्र रुप में अछि। फोटो पर चटका लगाउ और पढू।


